डॉ. हरविंदर मांकड़

 Hindi introduction



डॉ. हरविंदर मांकड़ एक अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार, लेखक और प्रेरक वक्ता (Motivational Speaker) हैं। उन्हें अमेरिका की विक्टोरिया ग्लोबल यूनिवर्सिटी से कला और संस्कृति में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त है। मात्र 15 वर्ष की आयु में कार्टूनिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मांकड़ ने बचपन से ही अपनी रचनात्मकता से सबको चकित किया।


उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘मोटू-पतलू’ है, जो पहली बार लोटपोट पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। वे लगातार 46 वर्षों से हर सप्ताह ‘मोटू-पतलू’ की नई कॉमिक्स श्रृंखला रचने वाले दुनिया के एकमात्र कलाकार और लेखक हैं — जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है।


डॉ. मांकड़ ने अब तक 22,000 से अधिक पुस्तकों का चित्रांकन (illustration) किया है। इस योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के हाथों गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। डॉ. कलाम की जीवनी पर पुस्तक को चित्रित करना और उसका विमोचन स्वयं डॉ. कलाम से करवाना, उनके जीवन की सबसे गौरवशाली उपलब्धियों में से एक है।


मोटू-पतलू के अतिरिक्त, डॉ. मांकड़ ने 200 से अधिक अनोखे कॉमिक किरदार भी रचे हैं, जिनमें प्रमुख हैं — जानबाज़ देवानटखट नीतूमिन्नी एंड गर्ल गैंगसंपत-चंपतमामाजी, और अन्य कई लोकप्रिय पात्र। ये सभी चरित्र बच्चों और युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं और समाज में हास्य, शिक्षा और प्रेरणा का संदेश देते हैं।


डॉ. मांकड़ ने चार हॉलीवुड फिल्मों में लेखक और स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा, उन्होंने अनेक हिंदी टीवी धारावाहिकों की रचना, लेखन और निर्देशन किया है। उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब तक 800 से अधिक विज्ञापन फिल्मों (commercials) का निर्माण कर चुके हैं।


वे ‘सेलिब्रिटी क्लब ऑफ इंडिया’ के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं — एक ऐसा मंच जो हज़ारों कलाकारों, सेलेब्रिटीज़ और समाजसेवियों को जोड़कर सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के कार्यों में जुटा है।


एक प्रेरक वक्ता के रूप में वे यूके, अमेरिका, दुबई, सिंगापुर और यूरोप सहित कई देशों की यात्राएँ कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने अपनी जीवन यात्रा, रचनात्मकता और संदेशों से हजारों लोगों को प्रेरित किया है।


डॉ. हरविंदर मांकड़ की पहचान केवल एक रचनाकार के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील विचारक, सामाजिक प्रेरक और भारतीय संस्कृति के सजग प्रहरी के रूप में भी स्थापित हो चुकी है।

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